1 जुलाई 2011 - 19:30

तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम ने कहा है कि पैग़म्बरे इस्लाम का अभियान अज्ञानता एवं अत्याचार के विरुद्ध एक विद्रोह था। तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी की घोषणा की वर्षगांठ पर इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी की घोषणा अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह था और इसी प्रकार मध्यपूर्व, फ़ार्स की खाड़ी तथा उत्तरी अफ़्रीक़ा के देशों में जनान्दोलन अत्याचार के विरुद्ध इस्लामी अभियान है।

तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम ने कहा है कि पैग़म्बरे इस्लाम का अभियान अज्ञानता एवं अत्याचार के विरुद्ध एक विद्रोह था।तेहरान की केन्द्रीय नमाज़े जुमा के इमाम हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी की घोषणा की वर्षगांठ पर इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी की घोषणा अत्याचार के विरुद्ध विद्रोह था और इसी प्रकार मध्यपूर्व, फ़ार्स की खाड़ी तथा उत्तरी अफ़्रीक़ा के देशों में जनान्दोलन अत्याचार के विरुद्ध इस्लामी अभियान है। हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम का दस वर्षीय शासन न्याय के प्रभुत्व का शासन था तथा इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद इस्लामी गणतंत्र ईरान भी सभी षडयंत्रों का डटकर मुक़ाबला कर रहा है। हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने कहा कि अत्याचार और अत्याचारियों के विरुद्ध ईरानी जनता का प्रतिरोध अब पूरे क्षेत्र में दिखाई दे रहा है तथा क्षेत्र के जनान्दोलनों ने यूरोप तथा अमरीका को भी प्रभावित किया है। हुज्जतुल इस्लाम काज़िम सिद्दीक़ी ने 28 जून 1981 की आतंकवादी घटना की ओर संकेत करते हुए कहा कि साम्राज्यवाद ने इस धमाके में इस्लामी गणतंत्र ईरान के 72 लोगों को शहीद कर दिया था। उन्होंने कहा कि ईरान की जनता और सरकार के विरुद्ध साम्राज्यवाद जितने षडयंत्र करेगा ईरानी राष्ट्र की जागरूकता उतनी ही बढ़ेगी और शत्रु अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकेगा।